हावी न होने दें तनाव को

तनाव जिसे अंग्रेजी में 'स्टे्रस कहते हैं, हर जगह व्याप्त है। हर देश में, हर जाति के लोगों में, हर धंधे में लगे व्यक्ति में, हर आयु वर्ग में, यहां तक कि बच्चों में भी तनाव देखा जा सकता है।  इस का प्रभाव व्यापक है, गहन है, गंभीर है।
मनोवैज्ञानिक बताते हैं कि तनाव हमारे परिवेश की चुनौतियों तथा दिन प्रतिदिन की बढ़ती अपेक्षाओं का सामना न कर सकने की हमारी क्षमता की मनोदैहिक तथा मनोभावात्मक अनुक्रि या मात्र है। जीवन की विभिन्न घटनाएं तथा प्रसंग, जीविका साधन में आए अनापेक्षित बदलाव, उलझी हुई पारिवारिक समस्याएं, वित्तीय एवं अन्य प्रकार की क्षति, गंभीर बीमारी अथवा मृत्यु का भय, किसी निकटतम प्रियपात्र के साथ कोई मामूली सी अनबन आदि तनाव का कारण बन जाते हैं। 
तनाव की अभिव्यक्ति इस की तीव्रता पर निर्भर करती है तथा विषाद (डिप्रेशन), थकावट, चिन्ता, स्नायुरोग, खीज, उच्च रक्तचाप, दमा, आमाशय-व्रण (गैस्ट्रिक अल्सर) यहां तक कि हृदय रोग के रूप में भी प्रकट हो सकती है। तनाव मूक प्रचालक है। चुपचाप अपना काम करता रहता है। इस के शिकार को तब तक इस का आभास भी नहीं होता जब तक  वह इस के आफ्टर-इफेक्टस से प्रभावित नहीं हो जाता।
हर प्रकार का तनाव हानिकारक भी नहीं होता। थोड़ा बहुत तनाव तो जीवन में आगे बढऩे, प्रगति करने, प्रतिस्पद्र्धा हेतु आवश्यक है। इस की अधिकता, वह भी एक साथ लंबे समय तक कष्ट पहुंचाती है। रक्तचाप की भांति इस का होना भी जरूरी है किन्तु सह्य सीमा के अंदर।
तनाव नियंत्रण के दो रास्ते हो सकते हैं-संघर्ष अथवा पलायन। या तो इस का सामना करें अथवा इस से बच निकलने का प्रयास करें। तनाव हमें घेरे ही नहीं, यह कामना तो निरर्थक है, अव्यवहारिक है। तनाव आज के जीवन का अभिन्न अंग है और रहेगा। इस का प्रभावक्षेत्र और व्यापकता बढ़ती ही जा रही है और आगे भी निरन्तर बढ़ती ही जाने की संभावना है। हां, हम इसे नियंत्रित रखने का प्रयास अवश्य कर सकते हैं, अपनी संकल्पशक्ति तथा आत्मसंयम से, अपनी मनोवृत्ति का परिष्कार करके, अपने मानस की मननशीलता से तथा ध्यान मेडिटेशन द्वारा।
तनाव का क्षेत्र व्यापक है। इस से छुटकारा न घर में है, न कार्यस्थल पर। कार्यालय में तनाव के विभिन्न स्रोत हो सकते हैं-कार्यालयीन नीतियां एवं पद्धतियां तथा प्रक्रियाएं, अधिकारियों, समकक्षों अथवा अधीनस्थों का व्यवहार या कार्यशैली, अव्यवहारिक कार्यप्रणाली, नकारात्मक संरचना, प्रतिकूल वातावरण आदि। तनाव से बचाव का एक मोटा सा असूल तो यह हो सकता है कि जिस बात पर, जिस काम पर, जिन हालात पर हमारा कोई कंट्रोल नहीं है उन पर ध्यान न दें। उन की उपेक्षा करें। जिन की उपेक्षा अवहेलना संभव न हो, उन पर नियंत्रण करें। इसे अंग्रेजी में कहते हैं-'इग्नोर वाट कैननाट बी कंट्रोल्ड एण्ड कंट्रोल वाट कैननाट बी इगनोर्ड। यह संसार तो जैसा है वैसा ही रहेगा। भुनभुनाने, झींकने, कोसने से कोई लाभ नहीं। बुरी से बुरी स्थिति से भी अधिक से अधिक लाभ उठाना हमारा ध्येय होना चाहिए। 
कल्पनालोक में न विचर कर हम वास्तविक धरातल पर उतर कर हर वस्तु का, व्यक्ति का, परिप्रेक्ष्य का वस्तुनिष्ठ तथा यथार्थवादी आकलन करें और तदनुसार व्यवहार करें, कार्य करें। वांछनीय है कि जीवन के प्रति हम एक शांत, निष्पक्ष, आवेगहीन रूख और रवैय्या अपनाएं। बहाव के प्रतिकूल लगातार तैरना थका देने वाला होता है। 
मान कर चलें कि हम यदि सोते भी रहेंगे तो भी सूरज तो अपने समय पर निकलेगा ही। सारी दुनिया हमारे चाहे अनुसार चले, यह सोचना ही बेमानी है। संसार तो अपने ढंग से, अपनी चाल से, अपनी मरजी से चलेगा। बेहतर यह है कि जब तक नितांत जरूरी न हो, हम भी धारा के साथ-साथ ही चलें और अकारण अपने को थकाएं नहीं। तनाव में न डालें।
'बीती ताहि बिसार दे, आगे की सुध ले', एक सार्थक, व्यवहारिक व उपयोगी उक्ति है। बीती बातों पर कुढऩे, पछताने, दुखी होने से कोई लाभ नहीं। उन्हें पीछे छोड़ कर आगे की सोचें। तनाव से बचने का एक सर्वानुमोदित सूत्र हड़बड़ी-जल्दबाजी, चिंता तथा गरिष्ठ भोजन से दूर रहना भी है। रिलैक्स करने का अभ्यास कीजिए। 
हड़बड़ी करने की आदत छोड़ दीजिए। अपने ही ऊपर सारा बोझ मत लादते जाइए। डेलीगेट कीजिए। अपनी रूचि के अनुरूप कोई हाबी, शौक व शगल रखिए। उस से मन मस्तिष्क को नई ऊर्जा मिलती है। तनाव से छुटकारा मिलता है। कभी-कभी बाहरी दुनिया से हट कर स्वयं से रूबरू होने का अवसर भी निकालिए।
महत्त्वाकांक्षा उचित है मगर बहुत अधिक उच्चाकांक्षी होना ठीक नहीं। लक्ष्य ऐसा होना चाहिए जो प्राप्त किया जा सके। हवा में उडऩा अपने आप को धोखा देना है। घर परिवार हो या कार्यस्थल, सब का सहयोग ले कर चलना ही हितकर है। उत्तेजना से बचिये। क्र ोध किसी समस्या का समाधान नहीं। 
इंसानी विसंगतियों और नासमझियों को हंस कर टाल जाइए। कार्यालय की परेशानियां यथासंभव घर मत ले आइए। रविवार और अवकाश फुरसत के लिए, हंसने खेलने के लिए, परिवार के साथ बिताने के लिए, मिलने मिलाने, आनन्द लेने के लिए होते हैं। समय समय पर छुट्टी लीजिए। परिवार के साथ घूमने जाइए। आप की पत्नी और बच्चे तनाव के विरूद्ध आप का सब से सक्षम कवच हैं। तनाव में होते हुए कभी धूम्रपान या सुरापान मत कीजिए। नींद की गोलियां मत लीजिए। इन से केवल अल्पकालिक अस्थायी आराम मिलता है। आदत जरूर पड़ जाती है। तनाव का ठिकाना मन है, अत: मन को सही दिशा में व सही दशा में रखना जरूरी है। आशावादी दृष्टिकोण, खुशमिजाज स्वाभाव, सकारात्मक व्यवहार, सब के प्रति सदभावना और संवेदना, आत्मानुशासन मन को स्वस्थ और तनावरहित रखने में सहायक होते हैं।
ओम प्रकाश बजाज