ब्लड प्रेशर एक गंभीर समस्या है। यह शरीर में छिपा एक घातक शत्रु है। अनियमित खानपान, गैस, अनिद्रा, नमक के अधिक सेवन से हाई ब्लड प्रेशर होना स्वाभाविक है। उससे परेशान लोगों को नियमित अभ्यास करना चाहिए। वे अभ्यास निम्न रूप से हैं:-
1. शीतली प्राणायाम 2 अंग संचालन 3 ध्यान 4 शवासन।
1. शीतली प्राणायाम:- सर्व प्रथम अनुलोम विलोम का अभ्यास करें। फिर सुखासन पर बैठकर जीभ को बाहर निकाल नलीनुमा बनायें और मुंह से श्वास अंदर खींचें। श्वास अंदर खींचने के बाद जीभ अंदर करके मुंह बंद करें, फिर नाक से धीरे-धीरे श्वास बाहर निकाल दें। यह क्रि या 5 बार करें और फिर धीरे धीरे बढ़ाकर 5० से 6० बार करें।
अंग संचालन:- अंग संचालन को सूक्ष्म व्यायाम भी कहा जाता है। इसका बहुत महत्त्व है। इसमें अभ्यस्त होने के बाद ही योग आसन करना चाहिए। इस संचालन के अन्तर्गत नेत्र, गर्दन, कंधे, हाथ पैरों की एड़ी पंजे को आगे पीछे मोडऩा व गोल गोल घुमाना, घुटनों को मोडऩा व गोल गोल घुमाना। गर्दन को क्लॉकपाइज घुमाना और मु_ियंा कस कर बांधना व खोलना। प्रतिदिन 1० बार रोज करें।
ध्यान:- सिद्धासन में बैठकर बांयें हाथ को अपनी गोद में रखें। हथेली ऊपर की ओर रखें। जब दोनों हाथों के अंगूठों के अग्रभाग को आपस में मिला दें। फिर आंखें बंद कर श्वासों के आवागमन को महसूस करें। यह मुद्रा पूरे स्नायुमण्डल और मन को शांत करती है।
शवासन:- शवासन सम्पूर्ण शरीर के शिथिलिकरण का अभ्यास है। इस आसन को करने के लिए पीठ के लेट जायें। समस्त अंग और मांसपेशियों को एकदम ढीला छोड़ दें। चेहरे का तनाव हटा दें। कहीं भी अकडऩ या तनाव न रखें। अब धीरे धीरे गहरी और लंबी सांस लें। महसूस करें कि गहरी नींद आ रही है। प्रतिदिन 1० मिनट तक अभ्यास करें।
अनोखी लाल कोठारी
योग द्वारा हाई ब्लड प्रेशर पर नियंत्रण